Interview: Manoj Bajpayee कहते हैं, यह देखें कि असली हिंदुस्तान कहां है?

Manoj Bajpayee ka hindi Interview

Manoj Bajpayee Interview: मनोज बाजपेयी बिहार का एक छोटा सा जिला चंपारण से आते हैं बॉलीवुड के सबसे सशक्त अभिनेताओं में शुमार हैं। पिछले साल उन्होंने पहली भोजपुरी रैप ‘बंबई में का बा‘ रिलीज की। जिसे दर्शकों द्वारा खूब पसंद किया गया। इस रैप सौंग में मजदूरों का पलायन दर्द छलकता है। किरदार को अपने अभिनय से जीवंत कर देने वाले बॉलीवुड के इस सबसे सशक्त अभिनेता ने अपने बारे में बात की। (Read Manoj Bajpayee Interview in Hindi)।

‘बंबई में का बा’ करने के पीछे असली वजह क्या रही?

इसकी सबसे बड़ी वजह इस रैप वीडियो के निर्देशक Anubhav Sinha हैं। अनुभव भोजपुरी के लिए कुछ बेहतर करना चाहते थे। लॉकडाउन के दौरान जिस प्रकार मजदूरों का पलायन हुआ, उसे देख उनके दिमाग में यह आइडिया आया। इसके बाद उन्होंने प्रसिद्ध कवि डॉ सागर से कुछ लिखने को कहा। फिर जो गीत उन्होंने दिया उसे पढ़कर दिल खुश हो गया।

इस गाने के जरिए बड़े शहरों में होने वाले परेशानियों को लेकर आपके क्या विचार हैं?

जो बड़े टाउन में पैदा हुए हैं उनकी भी कुछ दिक्कतें हैं। हर जगह भागमभाग है। आदमी एक मशीनरी बन गया है, जब तक चल रहा है तब तक सब कुछ ठीक है। जैसे ही वह रुकता है सब कुछ रुक जाता है। आपसी सोशल रिलेशन की कमी हो गई है। हर आदमी एक-दूसरे को खींचता-गिराता खुद आगे बढ़ने की कोशिश में है।

न्यू जनरेशन को अपनी जड़ों से जुड़े रहने की अहमियत कैसे बयां करेंगे?

जड़ों से जुड़े रहने के लिए आपको कोशिश नहीं करना पड़ता। हम जैसे लोग तो अपनी जड़ों से हमेशा जुड़े रहे हैं। मैं अपने आप में एक पूरा गांव हूं। मेरे हिसाब से मैं अकेले नहीं चलता, बल्कि पूरा गांव मेरे साथ चलता है। मैं बिहार के पश्चिमी चंपारण जिला के बेलवा गांव की पैदाइश हूं। इंटर तक वहीं रहा। मेरे माता-पिता अधिकतर वहीं रहते हैं। दोस्तों के गांव से आने-जाने से अधिक सच मुझे कुछ नहीं लगता। उनसे मैं हमेशा जुड़ा रहता हूं। जहां तक न्यू जनरेशन की बात है तो मैं कोई मैसेंजर नहीं हूं। मैं मानता हूं कि जिसे जो ठीक लगे, वो करे। हां, जो जड़ों से जुड़े रहते हूं उनमें कुछ अनोखापन होता है। मैं यही कहूंगा कि जो शहरों में हैं वे यह देखने की कोशिश करें कि असली हिंदुस्तान कहां है? क्योंकि ये आपको शहर के बाहर ही मिलेगा।

भोजपुरी फिल्मों का स्तर सुधारना कितना महत्वपूर्ण है?

देखिए, स्तर सुधारने वाले हम कौन होते हैं। भोजपुरी अपने आप में एक भाषा है। इसमें जो लोग काम करते हैं, उन्हें जैसा ठीक लगता है, वैसा कर रहे हैं। मुझे उनसे कोई शिकायत नहीं रही है। भोजपुरी का अपना डिस्ट्रीब्यूशन है, जिसे बस व्यवस्थित करने की जरूरत है। ताकि और लोग भी फिल्में बना सके। सिनेमाहॉल में प्रायोरिटी से उन्हें शो स्लॉट मिल सके, जैसे मराठी फिल्मों को वहां की सरकार ने समर्थन दिया। आप केरल, बंगाल या पंजाब को देखें। रीजनल सिनेमा तभी बेहतर करेगी जब वहां की राज्य सरकार का सहयोग मिले।

Covid-19 के कारण फिल्मों के शूट में हुए बदलावों में कौन सा बदलाव आपको अच्छा लगा?

इंसान खुद को किसी भी हालात में ढाल ही लेता है। फिलहाल कोई सुखद या बेहतर स्थिति नहीं है। हम चाहेंगे यह स्थिति जल्द से खत्म हो ताकि हम वापस सामान्य जीवन व्यतीत करें और अपना काम करें।

Read the latest and breaking Hindi news on moviezoobie.com. Get Hindi news about Bollywood, Hollywood, Lifestyle, Relationship, Celebrity and much more.

Interview: Jagran media

Related posts

Leave a Comment