बॉलीवुड में नेपोटिज्म वाले तत्व न समान लेकिन खामियाजा पूरी इंडस्ट्री को उठानी पड़ती है: जितेंद्र सिंह तोमर

इंडस्ट्री में नेपोटिज्म वाले तत्व जरूर लेकिन बेहद कम और खामियाजा पूरी इंडस्ट्री को उठानी पड़ती है: जितेंद्र सिंह तोमर

मुंबई, 15 से अधिक गानों के वीडियो को निर्देशित कर चुके इंडिपेंडेंट डायरेक्टर जितेंद्र सिंह तोमर अब ओटीटी की तरफ रुख करने की योजना को पूरी कर रहे हैं। फिलहाल अपने अगले प्रोजेक्ट जो कि एमएक्स प्लेयर (MX Player) की वेब सीरीज है, के साथ व्यस्त हैं। “कहानीबाज़ – द स्टोरी ट्रेलर” टाइटल से बन रहे इस सिरीज को खुद तोमर निर्देशित कर रहे हैं। अपने करियर को ले कर सकारात्मक सोचने वाले तोमर, राज कुमार हिरानी (Raj Kumar Hirani) को पसंदीदा निर्देशक मानते हैं। साथ ही साउथ के स्टार सूर्या और बॉलीवुड अभिनेता इमरान हाशमी (Emraan Hashmi) को निर्देशित करना चाहते हैं। पिछले सप्ताह 2 जुलाई को Zee Music के साथ तोमर के गीत सुरमयी नैन तेरे (Surmayee Nain Tere) ने रिलीज का एक वर्ष पूरा किया है। 

मूवीज़ूबी के साथ बातचीत करते हुए, जितेंद्र सिंह तोमर ने अपने संघर्ष और सफलता के बारे में खुल कर बातें की। तोमर कहते हैं कि जीवन में कोई भी मकसद के लिए बहुत कोशिशों और संघर्ष और सब्र की जरूरत होती है। आगे पढ़िये निखिल विद्यार्थी के साथ झारखंड के युवा निर्देशक जितेंद्र सिंह तोमर की बातचीत के प्रमुख अंश:

बॉलीवुड में नेपोटिज्म वाले तत्व न समान लेकिन खामियाजा पूरी इंडस्ट्री को उठानी पड़ती है: जितेंद्र सिंह तोमर

आप 2013 धनबाद (झारखंड) से मुंबई आए, तब से ले कर अब तक क्या और कितना कुछ बदला है? ऐसा लगता है?

जितेंद्र सिंह तोमर: मैं आठ साल पहले जब मुंबई आया और अब के वक्त को देखूं तो प्रोफेशनल रूप में और मेरे मेच्योरिटी के स्तर में बहुत अंतर देखता हूं। जिस वक्त मैं मुंबई आया, सीखने की अवस्था थी। मैंने सहायक निर्देशक के रूप में काम करना शुरु किया। इतने साल के बाद आज मैं एक स्वतंत्र निर्देशक हूं। मेरे प्रोफाइल में एक दर्जन से अधिक म्यूजिक वीडियो जुड़ चुके हैं। सभी भारत की बड़ी म्यूजिक कंपनियों के साथ हैं। जीवन के इस मुकाम तक पहुंचने के लिए बहुत संघर्ष व सब्र से गुजरना पड़ता है।

ओके, आप झारखंड से हैं और काम कर रहे हैं, लगता है कि एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में न्यूकमर्स को नेपोटिज्म का सामना करना पड़ता है?

तोमर: मुझे ऐसा नहीं लगता। हां ऐसे कुछ तत्व जरूर हैं, जिसका खामियाजा पूरी इंडस्ट्री को उठानी पड़ती है। लेकिन मैं उन्हें 1 प्रतिशत में गिनता हूं। यदि आप अपने लक्ष्य के प्रति ईमानदार और समर्पित हैं तो आप निश्चित रूप से अपना रास्ता खोज लेंगे। मैंने यहां तक पहुंचने के लिए 3 साल से अधिक समय तक संघर्ष किया है। मुंबई के इसी इंडस्ट्री में बहुत सारे दोस्त और परिवार बनाए हैं। जाहिर है भविष्य में मेरे बच्चों को उन सभी से मदद मिलेगी। कोई भी माता-पिता नहीं चाहते कि उनके बच्चे को वैसा ही कष्ट मिले जैसा उन्होंने सहा। अगर आप इसे नेपोटिज्म और वंशवाद कहते हैं, तो हां नेपोटिज्म बहुत है और हमेशा रहेगा।

अच्छा, आप कई पॉपुलर टीवी शो में डाइरैक्शन टीम के हिस्सा रहे हैं। टीवी और म्यूजिक वीडियो के निर्देशन में क्या समानताएं या भिन्नताएं हैं?

बॉलीवुड में नेपोटिज्म वाले तत्व न समान लेकिन खामियाजा पूरी इंडस्ट्री को उठानी पड़ती है zee music jitendra singh tomar interview

टीवी और फिल्म दोनों की अलग-अलग खेल हैं। टेलीविजन में आपको ज्यादा रचनात्मकता देखने को नहीं मिलती क्योंकि यह एक दैनिक दिनचर्या है। प्रोडक्शन को रोजाना शो चलाना पड़ता है। लेकिन फिल्म में यह पूरी तरह से निर्देशक और उनकी विजन पर निर्भर करता है। समय और पैसों की कोई सीमा या कमी नहीं रहती है।

क्या कभी हुआ कि आपके पास पैसे बिल्कुल न रहे हों, यदि हां, तो इसके प्रति आप क्या सोच रखते हैं?

(गहरी सांस लेते हैं, मुसकुराते हुए) कई बार, लेकिन अगर आप इस इंडस्ट्री में हैं तो यह जीवन का एक हिस्सा है। इस स्थिति को संतुलित करने के लिए आपको धैर्य और बहुत संयम से काम लेना पड़ता है।

अब आप संगीत वीडियो पर अधिक काम क्यों कर रहे हैं?

म्यूजिक वीडियोज को इन दिनों दर्शकों का खूब अटेंशन मिल रहा है। यह कम समय में पहचाने जाने के लिए एक अच्छा खेल बन गया है। सबसे महत्वपूर्ण आप अपनी क्रीएटिविटी का मार्केट बना लेते हैं

इंडस्ट्री में नेपोटिज्म वाले तत्व जरूर लेकिन बेहद कम और खामियाजा पूरी इंडस्ट्री को उठानी पड़ती है: जितेंद्र सिंह तोमर

म्यूजिक वीडियोज को इन दिनों दर्शकों का खूब अटेंशन मिल रहा है। यूट्यूब पर रोज ट्रेंडिंग वीडियोज में आपको रोजाना 2 या 3 म्यूजिक वीडियो ट्रेंड में मिल जाएंगे। तो अब यह कम समय में पहचाने जाने के लिए एक अच्छा खेल बन गया है। सबसे महत्वपूर्ण आप अपनी क्रीएटिविटी का मार्केट बना लेते हैं।

बड़े सपने लेकर मुंबई आने वालों से कुछ कहना चाहेंगे?

मैं कहना चाहूंगा, आपने सपने देखा है तो याद रखें इसमें समय लगता है। सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। इंडस्ट्री से जुड़े सच्चे और अच्छे लोगों को संबंध बनाते रहें। खुद के स्किल और नेटवर्क पर मेहनत करें। सब्र रखें, जरूर मौका मिलेगा।

क्रेडिट्स: Movie Zoobie

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