Toofan Movie Review Hindi – बॉक्सर अजीज अली के रूप में फरहान अख्तर असाधारण लेकिन फिल्म निराशाजनक

Toofan Movie Review Hindi - बॉक्सर अजीज अली के रूप में फरहान अख्तर असाधारण लेकिन फिल्म निराशाजनक

निखिल विद्यार्थी, मुंबई, Toofan Movie Review Hindi – वर्ष 2013 में रिलीज ब्लॉकबस्टर फिल्म भाग मिल्खा भाग (Bhaag Milkha Bhaag,  2013) के बाद फिल्मकार राकेश ओमप्रकाश मेहरा (Rakeysh Omprakash Mehra) एक बार फिर खेल के मैदान की कहानी ले कर आए हैं। जिसमें फरहान अख्तर (Farhan Akhtar) ने प्रसिद्ध ओलंपिक धावक की टाइटल भूमिका निभाई थी। शुक्रवार (16 जुलाई 2021) को अमेजन प्राइम वीडियो (Amazon Prime Video Original Film 2021 Hindi) पर अपनी फिल्म Toofan (Read review in hindi movie) के साथ दस्तक दिया। फिल्मकार राकेश ओमप्रकाश मेहरा (Rakeysh Omprakash Mehra) अमेजन प्राइम पर रिलीज फिल्म तूफान (Toofan 2021 Film) के साथ दूसरी बार खेल के मैदान में दूसरी बार दस्तक देते दिखे। जिसमें फरहान, निर्देशक Rakeysh Omprakash Mehra Director के तूफान में बॉक्सिंग रिंग में कदम रखते हैं। एक शुरुआती दृश्य में, मास्टर कोच नाना प्रभु (परेश रावल) अजीज अली (फरहान) से कहते हैं – एक व्यक्ति जिसके पास असाधारण ऊर्जा और असाधारण गति है, लेकिन तकनीक की कमी है – उसे रिंग को ही अपना घर मानना चाहिए। 

बॉक्सर अजीज अली के रूप में फरहान अख्तर असाधारण लेकिन फिल्म निराशाजनक
पढ़ें रिव्यू फिल्म तूफान का (Read Toofan Movie Review Hindi)

अली (फरहान अख्तर) डोंगरी के मुंबई उपनगर में डोंगरी-नागपाड़ा का एक गैंगस्टर है। जो अक्सर हिंसक तरीकों से जबरन वसूली और ऋण वसूली करता है। बॉक्सिंग से परिचय होने पर उसे लगता है कि मुक्केबाजी उसे एक शक्तिशाली ठग बनने में मदद कर सकती है। वह प्रभु (Paresh Rawal) के पास जाता है, जो शुरू में अली को प्रशिक्षित करने से मना कर देता है। क्योंकि वह डोंगरी का एक मुस्लिम है। कुछ संघर्षों के बाद कोच नाना अंततः मान जाता है।

मुस्लिम समुदाय के प्रति कोच नाना प्रभु की घृणा उसकी जवान पत्नी की एक आतंकी हमले में मौत से उपजी है। जो उसकी छोटी बेटी अनन्या सकुशल बच जाती है। अपने करीबी दोस्त विनय (Mohan Agashe) के बहुत समझाने के बावजूद वह हठपूर्वक रहता है। विनय और प्रभु को कई बार शाम में शराब पीते हुए देखते हैं। इस दौरान वह प्रभु को समझाते हैं, “सभी मुसलमान आतंकवादी नहीं हैं” वह बार-बार जोर देकर कहते हैं कि यह कभी भी सच नहीं हो सकता। लेकिन प्रभु का मन इस हद तक कठोर हो गया है कि वह एक मुस्लिम से चाइनीज खाना मंगवाने से भी कतराता है!

सालों बाद, अनन्या, प्रभु की बेटी (मृणाल ठाकुर Mrunal Thakur) बड़ी होकर गरीबों और जरूरतमंदों के लिए बने एक चैरिटी अस्पताल में बतौर डॉक्टर काम करने लगी है। अली और प्रभु की पहली मुलाकत में अली के साथ एक नाटकीय मुठभेड़ होती है। उसके सिर पर चोट लग जाती है और घाव हो जाती है। वह अनन्या के पास आता है, जब उसे पता चलता है कि अली को यह चोट में मार पीट में लगी है, तो वह उसे बाहर कर देती है।

फिल्म की दूसरी कथानक पूरी तरह से अनावश्यक लगती है

तूफान Toofan में एक जुनून है एक पागलपन है। इसका अंदाजा यूं लगाया जा सकता है, कि अली एक के बाद एक बॉक्सिंग मैच जीतता जाता है। धीरे-धीरे वह अनन्या की नजरों और दिल में जगह बना लेता है। इसके बाद की कथानक का अनुमान लगाने के लिए शर्लक होम्स होने की आवश्यकता नहीं है कि कथानक कहां समाप्त होगी? हालांकि, फिल्म की एक दूसरी कथानक पूरी तरह से अप्रत्याशित त्रासदी और अनावश्यक लगती है। जो प्रभु की जिद को और सख्त करने के लिए ही लिखी हुई जान पड़ती है।

दुर्भाग्य से, तूफान बहुत सारे मुद्दों के साथ अपने कैनवास को स्पॉट करने से वंचित रह जाता है। और अंजुम राजाबली (Anjum Rajabali) और विजय मौर्य (Vijay Maurya) द्वारा लिखी गई लगभग 160 मिनट की कहानी इतनी खींची हुई महसूस होती है। फिल्म की एडिटिंग को पता नहीं क्या किया गया है। फिल्म देखते हुए कई बार ऐसा लगता है, जैसे एडिटर के पास फिल्म को एडिट करने के लिए या तो टाइम नहीं था या फिर उनके पास फूटेज की कमी थी। क्योंकि कुछ ऐसे दृश्य हमेशा चलते रहते हैं। अली और अनन्या के बीच की प्रेम कहानी, पिता-पुत्री का रिश्ता, अनगिनत आंसू-झटके और कई गाने मूल कथानक को कमजोर करते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि तूफान (2021 bollywood film detailed review) के लिए बॉक्सिंग रिंग धूमिल लगने लगती है।

कथानक के इस हिस्से में यह वह जगह थी जहां चक दे इंडिया (Chak De India) और दंगल (Dhangal) जैसी फिल्मों ने फोकस किया था। यानि विषय के मूल पर बने रहे। जबकि तूफान अनावश्यक हमें व्यस्त रखने के लिए भावनात्मक कार्ड का उपयोग करता है। हालांकि, मेहरा एक बेहतरीन कास्ट को इकट्ठा करने में कामयाब रहे हैं। अख्तर पहले डोंगरी के ‘दादा’ के रूप में और बाद में एक अच्छा प्रेमी, पति और पिता के रूप में कमाल कोशिश करते हैं। उनका फिट से मोटा और फिर वापस ट्रांसफॉर्म देख आश्चर्य होता है। ठाकुर एक चुलबुली लड़की के रूप में अपनी मधुर मुस्कान और हर्षित चमक बिखेरती है, और परेश रावल और अगाशे सराहनीय विश्वास के साथ अपनी भूमिका निभाते हैं। अनन्या प्रभु (Mrunal Thakur) के किरदार को और प्यारा बनाया जा सकता था। कहानी लिखते समय अनन्या पर और काम होना चाहिए था, जिससे दर्शक किरदार को पसंद करते। तूफान फिल्म में बतौर दर्शक अनन्या के किरदार में कम मृणाल ठाकुर की मुस्कान को ज्यादा पसंद करते हैं।

इसके अलावा, तूफान में कुछ कमाल जैसा बहुत कम आग है। बॉक्सिंग पर इनकी जरूरत थी लेकिन शायद निर्देशक कुछ दो-तीन धरा दिखा कर कमाल करना चाहते थे पर चूक गए। फिल्म एक बार देखने में कोई गुरेज नहीं है। आपको अच्छा लगेगा। लेकिन फिल्म से कोई बहुत वाउ वाली अपेक्षा न रखें।

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